सुंदरकांड(sunderkand), रामायण का पांचवा अध्याय, हनुमानजी के वीरतापूर्ण कारनामों से ही नहीं, आध्यात्मिक चेतना को जगाने की अद्भुत क्षमता भी रखता है। इस यात्रा में एक अनोखा साथी होता है – तुलसी माला(Tulsimala)। ये साधारण सी दिखने वाली माला हनुमानजी के अनुग्रह का द्वार खोलती है और पाठ का अनुभव दिव्य बनाती है। आइए देखें तुलसी माला सुंदरकांड की साधना में कैसे जादू करता है:
पवित्रता का संगम: तुलसी को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, जो वैकुण्ठ धाम में विराजमान हैं। हनुमानजी भी श्री विष्णु के परम भक्त हैं। इस प्रकार, तुलसी माला अपने साथ पवित्रता और दिव्य ऊर्जा का संचार करती है, पाठ के दौरान वातावरण को शुद्ध करती है और नकारात्मक शक्तियों को दूर भगाती है।
ध्यान की साधना: तुलसी की सुगंध मन को शांत करती है और भटकाव कम करती है। माला हाथों में फेरते हुए पाठ करने से एकाग्रता बढ़ती है। शब्दों का अर्थ गहराई से समझ में आता है और हनुमानजी के साथ जुड़ाव का अनुभव होता है।
भक्ति का ज्वार: प्रत्येक मनका को स्पर्श करते हुए पाठ करने से एक विशेष प्रकार की लय बनती है। ये लय हृदय के तारों को झंकृत करती हैं और भक्ति का उफान लाती हैं। हनुमानजी के प्रति समर्पण बढ़ता है और पाठ का अनुभव भावपूर्ण और सार्थक होता है।

आत्मबल का संचार: हनुमानजी साहस और दृढ़ता के प्रतीक हैं। तुलसी माला पहनकर उनके गुणों का पुट आपके आत्मबल में आता है। पाठ के दौरान आने वाली बाधाओं का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है और जीवन में चुनौतियों से निपटने का हौसला बढ़ता है।
चक्रों का संतुलन: माना जाता है कि तुलसी माला में 108 मनके सात चक्रों के अनुरूप होते हैं। इन मनकों को स्पर्श करते हुए पाठ करने से ऊर्जा प्रवाह सुचारू होता है, चक्र संतुलित होते हैं और आध्यात्मिक विकास को गति मिलती है।
माला मंत्र जप: सुंदरकांड का पाठ माला के साथ करने से प्रत्येक श्लोक के साथ मंत्र का भी जप होता है। इस तरह मंत्र और माला का संयोग पाठ की शक्ति को दोगुना कर देता है और मन, वाणी और कर्म को पवित्र करता है।
पाठ की विधि:
• स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। • हनुमानजी के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें। • तुलसी माला हाथों में लेकर “ॐ श्री हनुमते नमः” मंत्र का उच्चारण करें। • प्रत्येक श्लोक का स्पष्ट उच्चारण करें और एक मनका को स्पर्श करें। • पाठ पूरा होने पर, माला हनुमानजी को अर्पित करें और कृतज्ञता व्यक्त करें। • कम से कम रोज़ाना एक माला का पाठ करें, विशेष रूप से मंगलवार या शनिवार को।
>>>सुंदरकांड के चमत्कारी मंत्र<<<
अंत में:
तुलसी माला सिर्फ माला नहीं है, बल्कि हनुमानजी के कृपा पाने का माध्यम है। सुंदरकांड का पाठ तुलसी माला से करने से साधक आध्यात्मिक उन्नति की राह पर तेजी से आगे बढ़ता है, मन की शांति पाता है और जीवन में सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।

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